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गरीब बच्‍चों को स्कूल भेजना ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य

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मैं अपनी सैन्य छावनी में लौट आया, मगर मैं कूड़ा बीनने वाले उन बच्चों को भूल नहीं पा रहा था. मेरे वरिष्ठ ऑफिसर बेहद कठोर स्वभाव के थे, फिर भी वह अपने जूनियरों का हालचाल लेने अक्सर आते रहते थे. मैंने उन्हें पूरी घटना सुनाई  उनके सामने गरीब बच्चों के लिए कुछ करने की अपनी ख़्वाहिश जाहीर की. मैंने अपने ऑफिसर से ड्यूटी के बाद बच्चों को पढ़ाने की मोहलत देने की अनुमति मांगी, जिसके लिए ऑफिसर ने तुरंत हां कर दी. 26 जनवरी, 2001 को मैंने अमृतसर में पांच बच्चों को पढ़ाना प्रारम्भ किया  तब से आज तक निरंतर इसी कोशिश में रहता हूं कि किस तरह भाग्य के मारे इन बच्चों को किताबों के करीब ला सकूं.

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दो वर्ष बाद मेरा ट्रांसफर जम्मू हो गया. मुझे अपने तबादले के बारे में पहले ही पता चल चुका था, सो मैं इस तैयारी में जुट गया था कि उन बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो. मैंने ऐसे नेक लोगों की तलाश कर ली थी, जिन्होंने मेरे जाने के बाद मेरा कार्य जारी रखा. जम्मू जाकर भी मैंने अपना पुराना कार्य जारी रखा. पंद्रह वर्ष तक राष्ट्र की सेवा करने के बाद करीब दस वर्ष पहले मैं गढ़वाल राइफल से रिटायर हो गया.

हालांकि मैं बच्चों को पढ़ाता था, पर देहरादून में रह रहे अपने परिवार के साथ घर पर खाली बैठ पाना मेरी फितरत के विरूद्ध था. मेरे परिवार को लगता था कि सिर्फ बच्चों को पढ़ाने का मतलब है कि मैं घर का पैसा बर्बाद कर रहा हूं. मैं बच्चों को पढ़ाता रहूं, परिवार की नाराजगी  न बढ़े, इसलिए मैंने एक बैंक में सिक्योरिटी गार्ड की जॉब करने का निर्णय लिया. यही ऐसा कार्य था, जो हम रिटायर्ड सैनिक सरलता से कर सकते हैं.

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मैंने एक राष्ट्रीय बैंक के एटीम के प्रहरी की जॉब प्रारम्भ कर दी. मेरी ड्यूटी शिफ्ट शाम से देर रात तक की थी. छह हजार रुपये प्रति महीने मिलने वाली पगार को मैं अपने लिए नहीं, बल्कि गरीब बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी जरूरतों पर खर्च करता हूं. इन बच्चों के जन्मदिन पर केक काटने के साथ इनके लिए पार्टी भी आयोजित की जाती है. घर-परिवार वाले बहुत ज्यादासमय तक इस बात को लेकर भी मुझसे नाराज रहे, लेकिन धीरे-धीरे मेरे कार्य की सकारात्मकता ने उनका नजरिया बदल दिया  आज उन्हें मुझ पर गर्व है.

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मैं मानता हूं कि एक सैनिक का कार्य लड़ना है, लेकिन सभी लड़ाइयां बाहरी दुश्मनों के विरूद्ध सीमाओं पर ही नहीं लड़ी जातीं. मेरी लड़ाई निरक्षरता  गरीबी के विरूद्ध है. बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए एक प्रयत्न है. मैंने यह लड़ाई किसी जीत के लिए नहीं, बल्कि खुद की खुशी के लिए छेड़ी है  मैं अंतिम सांस तक इसे जारी रखना चाहता हूं.

-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित.

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