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म्यांमार ने रोहिंग्या शरणार्थी समस्या को लेकर कड़ी रिएक्शन जाहीर की

Image result for रोहिंग्या शरणार्थी समस्यायंगून: म्यांमार ने रोहिंग्या शरणार्थी समस्या से निपटने के उसके तरीके के प्रति संयुक्त देश सुरक्षा परिषद के आलोचनात्मक रुख पर बुधवार (8 नवंबर) को कड़ी रिएक्शन जाहीर की म्यांमार ने बोलाकि इससे बांग्लादेश से मुस्लिम अल्पसंख्यकों की वापसी के प्रयासों को ‘‘गंभीर नुकसान’’ हो सकता है संयुक्त देश के सर्वोच्च निकाय ने सोमवार (6 नवंबर) को एक बयान में म्यांमार से सैन्य अभियान पर लगाम लगाने का आह्वान किया था सैन्य अभियान की वजह से इस वर्ष अगस्त से अब तक करीब छह लाख रोहिंग्या बांग्लादेश पलायन कर चुके हैं इससे गंभीर मानवीय संकट खड़ा हो गया है

बयान में हत्या, यौन हिंसा  घरों तथा संपत्तियों को जलाये जाने जैसे अधिकार उल्लंघन के मामलों पर ‘‘गंभीर चिंता’’ जाहीर की गयी इसमें वे घटनायें भी शामिल हैं जिनके लिये म्यांमार की सेना को जिम्मेदार बताया जा रहा है संयुक्त देश के बयान पर रिएक्शन देते हुये बुधवार को म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की ने बोला कि बयान ‘‘उन मुद्दों की अनदेखी करता है जिसका सामना आज म्यांमार  बांग्लादेश कर रहे हैं  इसे द्विपक्षीय रूप से, सर्वमान्य तरीके से दोनों पड़ोसी राष्ट्रोंके बीच ही हल किया जा सकता है ’’

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वहीं दूसरी ओर हाल ही में बांग्लादेश का दौरा करने वाले एक शीर्ष अमेरिकी ऑफिसर ने रोहिंग्या शरणार्थी संकट पर क्षोभ जाहिर करते हुये बोला कि उन्होंने वहां अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के विरूद्ध की गयी ‘‘ज्यादती के साक्ष्य’’ देखे म्यांमार में हिंसा से बचने के लिये लाखों रोहिंग्या मुसलमान वहां भाग आये हैं संयुक्त देश के अनुमान के मुताबिक म्यांमार के रखाइन प्रांत में सुरक्षा बलों द्वारा मुसलमानों के विरूद्ध 25 अगस्त को अभियान प्रारम्भ करने के बाद से करीब 6,00,000 से अधिक रोहिंग्या मुसलमान सीमा-पार कर बांग्लादेश आ गये म्यांमार रोहिंग्या को जातीय समूह के तौर पर मान्यता नहीं देता  जोर देता है कि वह बांग्लादेशी प्रवासी हैं जो गैरकानूनी रूप से राष्ट्र में रह रहे हैं

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जनसंख्या, शरणार्थी  प्रवासी मामलों के कार्यवाहक सहायक विदेश मंत्री साइमन हेन्शॉ ने मंगलवार (7 नवंबर) को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हमने शिविरों में जो देखा वह स्तब्ध कर देने वाला था शरणार्थी सकंट भयावह है ’’ हेन्शॉ की अगुवाई में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल 29 अक्तूबर से चार नवंबर तक बांग्लोदश के दौरे पर गया था यह दल कॉक्स मार्केट के निकट स्थित शरणार्थी शिविरों में भी गया था

सहायक विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘मुश्किल दशा हैं लोग परेशान हैं रोते हुए कई शरणार्थियों ने हमें बताया कि उनके सामने उनके गांवों को जलाया गया, उनके रिश्तेदारों को मार डाला गया यह देखना बेहद कठिन था कुछ लोगों ने बताया कि उन पर वहां से भागते समय गोलियां चलाई गईं ’’ हेन्शॉ ने बताया कि सदमे के बावजूद कई लोगों ने अपनी सुरक्षा एवं अधिकारों की गारंटी मिलने पर बर्मा स्थित अपने घर लौटने की ख़्वाहिश जाहिर की है

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