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नोटबंदी व GST एक संगठित लूट व वैधानिक डकैती

Image result for नोटबंदीनोटबंदी  GST के दोहरे आघात राष्ट्र की अर्थव्यवस्था के लिए पूरी तरह विपत्ति साबित हुए हैं. इस भारी भूल से मोदी गवर्नमेंट ने कोई सबक नहीं सीखा है. मैंने नोटबंदी की आलोचना में राज्यसभा में अपने सम्बोधन में जो कुछ बोला था, आज उसे फिर दोहरा रहा हूं कि बेहद असावधानी के साथ उठाया गया यह कदम दरअसल एक संगठित लूट  वैधानिक डकैती है. गवर्नमेंट का यह कदम अपने किसी भी उद्देश्य को हासिल नहीं कर पाया है. यह बेहद बेकार तरीके से जल्दबाजी में उठाया गया कदम था.
दृढ़ विश्वास के साथ दिखाए गए साहस  करीने से अमल करने की क्षमता की तुलना अक्खड़पन नाटकबाजी से नहीं की जा सकती है. यही वजह है कि नोटबंदी  उसके बाद लागू किए गए GST से व्यापारी वर्ग के अंदर कर आतंकवाद काभय बहुत ज्यादा गहरे तक समा गया है.

नोटबंदी से कर चोरी  काले धन की बुराइयों को दूर नहीं किया जा सकता है. कुल मिलाकर नोटबंदी राजनीतिक फसल काटने का एक तरीका बनकर रह गया है, जबकि काले धन के वास्तविकक्रिमिनल खुलेआम घूम रहे हैं. इसलिए मैं फिर से दोहराता हूं कि नोटबंदी संगठित लूट  कानूनी डकैती के अतिरिक्त  कुछ नहीं है.

अगर मोदी को प्रेरणा ही लेनी थी तो उन्हें संसार भर में मशहूर गुजरात के दो महान सपूतों महात्मा गांधी  सरदार बल्लभ भाई पटेल से लेनी चाहिए थी. क्या पीएम ने नोटबंदी के निर्णय पर रिजर्व बैंक को अमल करने का आदेश देने से पहले महात्मा गांधी को याद किया था? अगर उन्हें महात्मा गांधी याद आए होते तो राष्ट्र के गरीबों को वो दुख नहीं झेलने पड़ते, तो उसे नोटबंदी के कारण सहने पड़े.

जनता को अच्छा शासन देने के लिए दिल के साथ दिमाग की भी आवश्यकता होती है लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि केंद्र गवर्नमेंट न तो दिल से कार्य कर रही है  न ही दिमाग से. एक बार ठहरकर सोचिए कि नोटबंदी  GST के कारण अर्थव्यवस्था को जो नुकसान हुआ उसकी मूल्यकिसे चुकानी पड़ी है.

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जाहिर है कि जिनकी नौकरियां गई, जिनकी फैक्ट्रियों में ताले पड़े, जिन उद्यमियों की परियोजना प्रारम्भ होने से पहले ही बंद हो गईं, वही इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए. इसी तरह GST को लागू करने से पहले पीएम को सरदार पटेल को याद करना चाहिए था.

आजादी के बाद राष्ट्र के एकीकरण की योजना पर अमल करने से पहले पटेल ने छोटी से छोटी बात का ख्याल रखा था, लेकिन मोदी ने तो इसे इतनी जल्दबाजी में लागू किया कि इसके सिर्फ बुरे परिणाम सामने आ रहे हैं.

सबसे ज्यादा दुखद तो यह है कि इस गवर्नमेंट ने कोई सबक नहीं सीखा. नोटबंदी के कारण बेहाल हुए गरीबों, किसानों, व्यापारियों  छोटे एवं मझोले उद्यमियों को राहत देने के बजाय GST को लागू कर दिया गया.

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नोटबंदी के बाद मैंने राज्यसभा में गवर्नमेंट से अनुरोध किया था कि इसकी वजह से प्रभावित लोगों को राहत देने के तरीका किए जाएं, लेकिन गवर्नमेंट ने एक नहीं सुनी  राहत देने के बजाय GST के रूप में उन्हें एक नयी आफत दे दी.

मोदी गवर्नमेंट की बुलेट ट्रेन परियोजना व्यर्थ की एक्सरसाइज़ साबित होगी. इससे न तो साढ़े छह करोड़ गुजरातियों को लाभ होगा  न ही इस राष्ट्र को. गुजराती उद्यमी बखूबी जानते हैं कि अगर कोई सौदा इतना अच्छा है कि उस पर यकीन न हो, तो समझ जाइए कि उससे कोई लाभ नहीं होने वाला है.

बुलेट ट्रेन की परियोजना में हाथ डालने के बजाय गवर्नमेंट को मौजूदा रेल नेटवर्क को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए था. बुलेट ट्रेन के लिए जापान से रियायती दर पर मिलने वाले 88 हजार करोड़ रुपये अभी भले ही बहुत सस्ता लग रहा हो लेकिन इसे चुकाना भी पड़ेगा.

किसानों की आमदनी को 2022 तक दोगुना करने का मोदी गवर्नमेंट का वादा महज जुमला साबित होने जा रहा है. अगले पांच वर्ष में इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि एरिया को सालाना 10 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करनी होगी. मोदी गवर्नमेंट के पहले तीन वर्ष में इस एरिया की औसत वृद्धि दर 1.8 प्रतिशत रही है, जबकि यूपीए के 10 वर्ष के शासनकाल में यह दर 3.7 प्रतिशत रही थी.

यही नहीं, मोदी ने दावा किया है कि अगले पांच वर्ष में हिंदुस्तान विकसित राष्ट्र बन जाएगा. अगर वे ऐसा कर पाते हैं तो इस दुनिया में मुझसे ज्यादा खुश कोई नहीं होगा. लेकिन क्या यह सच बन सकता है? मुझे नहीं लगता है कि यह संभव है क्योंकि विकसित राष्ट्रों में सबसे गरीब ग्रीस की प्रति आदमीआय 25 हजार डॉलर है जबकि हिंदुस्तान की प्रति आदमी आय 5000 डॉलर है.

अगले पांच वर्ष में इसमें पांच गुनी वृद्धि के लिए 35 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर हासिल करनी होगी. अब तक कोई राष्ट्र ऐसा नहीं कर पाया है. क्या मोदी ऐसा कर पाएंगे?

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