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आंगनवाड़ी शिक्षिका ने की आत्महत्या, 5 माह से नही मिली थी वेतन

Image result for आत्महत्यापरभणी : महाराष्ट्र के परभणी जिले में एक आंगनवाड़ी शिक्षिका ने आत्महत्या कर ली है मिली जानकारी के अनुसार उसने यह कदम, पिछले 5 माह से वेतन न मिलने के कारण अपनी आर्थिक स्थिति से परेशान हो कर उठाया जानकारी के लिए बता दें की कुछ समय पूर्व आंगनवाड़ी के कर्मचारियों ने पूरे राज्य में अपनी मांगो को लेकर हड़ताल भी की थी आंगनवाड़ी के कर्मचारियों की हमेशा से यही शिकायत रही है कि गवर्नमेंट द्वारा स्कूल से सम्बंधित किसी भी आवश्यकता पर ध्यान नहीं दिया जाता  लिखित में देने पर भी उसे नज़र अंदाज़ किया जाता है इसके अतिरिक्तसभी कर्मचारियों कि शिकायत है कि उन्हें कभी भी वेतन समय से नहीं मिलता

अब ऐसे में 5 माह से वेतन ना मिलने के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रही एक शिक्षिका ने अपने ही घर पर फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली जिन्तूर तहसील के बोर्डी की यह घटना है शिक्षिका का नाम सुमित्रा भगवानराव राखुंडे है  वह 54 वर्षीय थी सुमित्रा के घर से एक सुसाइड नोट भी मिला है जो उन्होंने आत्महत्या से पहले लिखा था सुसाइड नोट में सुमित्रा ने लिखा था कि – ‘पांच महीनों से वेतन नहीं मिलने की वजह से खाली पेट रहने की नौबत आ गई. बिना वेतन के घर का गुजारा नहीं हो पा रहा है. ऐसी हालत में जीना दुर्भर हो चुका है. इसलिए आत्महत्या करने जैसा कदम मुझे उठाना पड़ रहा है ‘

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सुमित्रा 2001 से नांगण गांव स्थित एक आंगनवाड़ी में बतौर शिक्षिका काम कर रही थी वहीं सुमित्रा के रिश्तेदारों का आरोप है कि वेतन ना मिलने से सुमित्रा काफी तनाव में थी  आत्महत्या जैसा कदम उठाया सुमित्रा ने इस आंगनवाड़ी में 100 रुपए के मानधन से अपना काम शुरू किया था रिकॉर्ड दर्ज़ किये जाने वाले रजिस्टर को जब एकात्मिक बाल विकास प्रकल्प ऑफिस द्वारा उपलब्ध कराने की मांग की गयी, तब यह बात सामने आयी कि आंगनवाड़ी के बच्चो को मंदिर में पढ़ाया जाता था इसलिए रजिस्टर भी मंदिर में ही रहता था

एकात्मिक बाल विकास प्रकल्प ऑफिस 2008 से 2017 तक यानि 10 वर्षों का लेखा-जोखा माँगा था तब जानकारी मिली कि 2008 से 2012 का रजिस्टर मंदिर में ही रखा जाता था लेकिन वहां से रजिस्टर गायब हो गए हैं ऐसे में जून से अक्टूबर माह का वेतन ना मिल पाने की वजह से इस बार की दीवाली भी सभी कर्मचरियों के लिए बेरंग रही यह बात सुमित्रा के सुसाइड नोट में सामने आयी

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