Thursday , 21 June 2018
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भय्यूजी महाराज की मौत, सुसाइट नोट का दूसरा पन्ना अाया सामने

अाध्यात्मिकसंत भय्यूजी महाराज की मौत के दूसरे दिन अंतेष्टि के अच्छा पहले सुसाइड नोट का दूसरा पन्ना सामने आ गया है. अंग्रेजी में लिखे इस सुसाइड नोट में लिखा है कि मेरे सारे वित्तीय, संपत्ति से जुड़े, बैंक अकाउंट के अधिकार विनायक देखेगा. वहीं मेरी स्थान साइनिंग आथोरिटी होगा. उस पर मुझे सबसे ज्यादा भरोसा है. मैं यह बात बगैर किसी दबाव के लिख रहा हूं.हालांकि इस पन्ने पर पहले पन्ने की तरह भय्यूजी महाराज की साइन नहीं है, लेकिन लिखावट उनकी बताई जा रही है. यह नोट उस वक्त सामने आया है जब महाराज की करोड़ों की संपत्ति के दावेदारों के बारे में कयास का दौर प्रारम्भ हो गया है.

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करीब डेढ़ वर्ष पहले हुई दूसरी विवाह के बाद से ही भय्यूजी महाराज बेटी  पत्नी के बीच चल रहे टकराव की वजह से तनाव में थे. इस समय भी उनके सबसे करीब उनका सेवादार विनायक ही था.आत्महत्या से एक दिन पहले सोमवार को जब वे बेटी से मिलने पुणे जा रहे थे तो उस वक्त भी उनके साथ गाड़ी में विनायक  एक अन्य सेवादार शेखर था. पुलिस पूछताछ में इन्हीं दोनों ने खुलासा किया कि वे भय्यूजी महाराज बेटी-पत्नी के बीच रिश्तों में सामंजस्य नहीं बैठा पाने की वजह से बेहद तनाव में थे. कई बार वे इस मामले को लेकर रूआसां भी हो जाते थे.

सुसाइड नोट में लिखा-संपत्ति विनायक देखे 

तलाशी लेने पर फोंरेंसिक एक्सपर्ट  पुलिस को कमरे से सुसाइड नोट मिला है. डीआईजी के मुताबिक, सुसाइड नोट में लिखा कि ‘मैं फेडअप हो गया हूं इसलिए छो़़डकर जा रहा हूं. आश्रम, संपत्ति संबंधी जो भी आर्थिक मामले हैं, उन्हें विनायक देखेगा. कुछ पंक्तियों में यह भी लिखा कि कोई उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाए.

विनायक ने पुलिस को बताया कि वही महाराज के फोन सुनते थे, लेकिन सोमवार को इंदौर से पुना जाते वक्त महाराज के पास आए सात फोन पर उन्होंने खुद ही बात की. फोन आते ही वे गाड़ी में साथ बैठे दोनों सेवादारों को उतार अकेले में बात कर रहे थे. बुधवार को भय्यूजी महाराज द्वारा लिखे सुसाइड नोट का दूसरा पन्ना भी सार्वजनिक हो गया. इसमें उन्होंने अपने सारे वित्तीय अधिकार पत्नी, बेटी या किसी अन्य परिजन को देने के बजाय विनायक को सौंपने की बात लिखी है. इस पन्नो पर उन्होंने एक बार फिर विनायक को ही सबसे ज्यादा भरोसेमंद बताते हुए बोला है कि वहीं मेरी स्थान साइनिंग आथोरिटी भी होगा.

यह सिर्फ प्रबंधन के लिए लेटर है
इंदौर हाई न्यायालय के सीनियर वकील विनय सराफ का कहना है कि भय्यूजी महाराज द्वारा लिखे नोट को कानूनी तौर पर उत्तराधिकारिता प्रमाण लेटर नहीं माना जा सकता. यह प्रबंधन लेटर (लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन) है. हालांकि इस नोट के आधार पर विनायक कोर्ट में अधिकारिता प्रमाण लेटरहासिल करने के लिए गुहार लगा सकते हैं. अगर न्यायालय प्रमाण लेटर जारी कर देता है तो वे साइनिंग ऑथोरिटी बन जाएंगे.

बेटी के कमरे में मारी खुद को गोली

पुलिस के मुताबिक, भय्यूजी महाराज दोपहर को आकस्मित बेटी कुहू के कमरे में रखे बींस बैग पर जाकर बैठ गए. कुछ देर बाद उन्होंने दाई कनपटी पर रिवॉल्वर अड़ाकर गोली मार ली. परिजन ने देखा मृत शरीर के पास रिवॉल्वर पड़ी हुई है. परिजन, कर्मचारी  अनुयायी तुरंत उन्हें लेकर बॉम्बे हॉस्पिटल पहुंचे. डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने घर के आठ कमरों की तलाशी ली तो भय्यूजी महाराज के कमरे से पॉकेट डायरी में लिखा सुसाइड नोट मिल गया. कुछ ही देर में सोशल मीडिया के जरिए पूरे राष्ट्र में यह समाचार फैल गई. बॉम्बे हॉस्पिटल, बापट चौराहा स्थित आश्रम (सूर्योदय)  सिल्वर स्प्रिंग स्थित निवास के बाहर उनके समर्थक, नेता, अनुयायी अफसरों की भीड़ जमा हो गई. भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस को 10 थानों का बल लगाना पड़ा.

कुछ देर पहले ही मां ने खाने का पूछा था
परिवार के सूत्रों के अनुसार हादसे से कुछ देर पहले ही मां कुमुदनी देशमुख ने महिला कर्मचारी से पूछा था कि भय्यूजी ने खाना खाया या नहीं. इस पर उन्हें बताया गया कि उन्होंने खाना खा लिया है वे अपने कमरे में हैं. देर शाम तक मां को घटनाक्रम  भय्यूजी महाराज की मौत के बारे में नहीं बताया गया.

आश्रम में लिखा आखिरी संदेश 
भय्यूजीजी महाराज ने आश्रम में अपने आखिरी संदेश में लिखा था कि आदमी के लिए विश्वास ही सब कुछ है, तुम अगर उस पर भी विश्वास को खो देते हो तो इससे बड़ा डाउनफाल दूसरा नहीं हो सकता.