Thursday , 21 June 2018
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बैतूल जिले में पशु प्रेम की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में पशु प्रेम की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली.किसान परिवार की माली दशा एक अकेले भैंसे से बदल कर रख दी  जब उस भैंसे का निधन हुआ तो पूरा परिवार शोक में डूब गया. किसान परिवार  भैंसे के बीच के प्रेम संबंध का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि उसकी मौत पर तेरहवीं की गई औरदर्जनभर गांव के लोगों को भोज भी कराया गया.

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पशु प्रेम का ये अनोखा मामला मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के ग्राम चूड़िया का है.दरअसल, गांव के एक किसान मुसरू यादव के परिवार में 25 वर्ष से सदस्य की तरह रहे भैंसे की मौत हो गई. किसान परिवार की आर्थिक उन्नति में जरूरी किरदार निभाने वाले भैंसे की मौत होने से पूरे परिवार में मातम छा गया. परिवार ने भैंसे का नाम राजाजी रखा था.

25 वर्ष तक परिवार की आमदनी का सहारा रहे भैंसे की मौत के बाद ग्रामीणों के साथ उसका हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया. सोमवार को तेरहवीं में आसपास के दर्जनभर गांवों के लोगों को आमंत्रित किया गया  श्रद्धांजलि देने के बाद भोज कराया गया.

बाकायदा शोक संदेश छपवाया

किसान परिवार ने भैंसे की तेरहवीं प्रोग्राम के लिए शोक संदेश (आमंत्रण पत्र) छपवाया  पूरे गांव के अतिरिक्त आसपास भी वितरित किया. तेरहवीं पर ग्रामीणों ने भैंसे की फोटो पर पुष्प चढ़ाए  उसे श्रद्धांजलि दी. चूड़िया गांव में केवल ढाई एकड़ जमीन के मालिक मुसरू यादव ने बताया कि वह मजदूरी करने के लिए दूसरे किसानों के खेतों में जाता था. करीब 25 वर्ष पहले 25 माह के भैंस के बच्चे को घर लाया  उसका पालन पोषण किया.
जब वह युवा अवस्था में पहुंचा तो प्रजनन के काम से परिवार को आय होने लगी. अच्छी देखभाल के कारण दूर-दूर के गांवों से लोग अपनी भैसों को प्रजनन के लिए लेकर आने लगे मुसरू यादव के परिवार को अलावा आय होने लगी थी. मुसरू ने बताया कि राजाजी ने ही परिवार को आर्थिक संकट से उबारा था  इसी के कारण
श्रद्धाजंलि देकर गांव को भोज कराया है. आज राजाजी के न रहने से पूरा परिवार दुखी है.