Tuesday , 19 June 2018
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फेसबुक ने किया डाटा साझाकरण समझौते का बचाव

कैम्ब्रिज डाटा लीक मामले के बाद फेसबुक एक  मामले में टकराव में घिर गई है. चूंकि फेसबुक सोशल मीडिया पर सेवा देने वाली संसार की सबसे बड़ी कंपनी है इसलिए उसने अपने यूजरों की व्यक्तिगत जानकारियां बडे़ पैमाने पर मोबाइल फोन  डिवाइस निर्माता कंपनियों को प्रदान की हैं.फेसबुक ने Smart Phone बनने वाली जिन 60 कंपनियों को अपने यूजरों  मित्रों की व्यक्तिगतसूचनाएं साझा की हैं उनमें एप्पल, अमेजॉन, ब्लैकबेरी, माइक्रोसॉफ्ट  सैमसंग भी शामिल हैं. Image result for फेसबुक ने किया डाटा साझाकरण समझौते का बचाव

फेसबुक ऐप के Smart Phone प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर आने से पहले ही फेसबुक ने डिवाइस निर्माताओं के साथ डाटा शेयरिंग पार्टनरशिप से जुड़ी यह डील कर ली थी. कंपनी के एक ऑफिसर के हवाले से दी गई जानकारी के मुताबिक, डिवाइस मेकर्स के साथ की गई यह डील अभी भी असर में है.इस समझौते से फेसबुक को अपनी पहुंच बढ़ाने में बड़ी मदद मिली है. इसके अतिरिक्त फोन निर्माता मैसेजिंग या लाइक बटन  एड्रेसबुक जैसे सोशल नेटवर्क से जुड़े मशहूर फीचरों का ऑफर भी फेसबुक को दे सकते हैं.

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने राजनीतिक सलाहकार फर्म कैम्ब्रिज एनालिटिका से जुड़े घोटाले के बाद ग्राहक डाटा संबंधी व्यवहार पर नयी रोशनी के साथ यह बड़ा खुलासा किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, मोबाइल मेकर्स के साथ ये डील 2010 के पहले ही कर ली गई थी. डिवाइस कंपनियों को यूजरों का डाटा पहुंचाने के विषय में फेसबुक ने अपने मित्रों (फ्रैंड्स) की स्पष्ट सहमति भी नहीं ली. जबकि उसने अपने यूजरों के साथ स्पष्ट घोषणा की है कि वह उनकी सहमति के बिना बाहरी लोगों के साथ उनकी कोई जानकारी साझा नहीं करेगा.

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‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के साथ एक इंटरव्यू में फेसबुक ने अपने डाटा साझाकरण समझौते का बचाव किया है. फेसबुक ने जोर देकर बोला कि यह उसकी गोपनीयता नीतियों, एफटीसी समझौते  यूजरों के साथ किए गए समझौते के अनुरूप है. फेसबुक उपाध्यक्ष आर्किबांग ने बताया कि यह गठबंधनइस तरह से कार्य करती है कि एप निर्माता हमारे मंच का भी उपयोग करते हैं.

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कंसेंट डिक्री कानून का सीधे तौर पर हुआ है उल्लंघन
यद्यपि फेसबुक ने डिवाइस निर्माता कंपनियों के साथ यूजरों का डाटा साझा करने को लेकर अपना बचाव किया है लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, यह डील अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन के साथ फेसबुक की ओर से 2011 में प्राइवेसी प्रोटेक्शन एंड कम्प्लाइंस पर की गई कन्सेंट डिक्री का सीधा सीधा उल्लंघन है. इस बारे में फेसबुक द्वारा कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है.

बता दें, कैम्ब्रिज एनॉलिटिका डाटा लीक कांड सामने आने के बाद फेसबुक पहले से ही करोड़ों यूजर्स के डाटा का गलत प्रयोग करने को लेकर विवादों में फंसी है. फेसबुक का दावा है कि कैम्ब्रिज एनॉलिटिका ने फेसबुक के डाटा तक पहुंच का गलत लाभ उठाया. यानी दूसरे शब्दों में उसने माना कि कंपनी ने डाटा पहुंच से जुड़ी पाबंदियों का उल्लंघन भी किया.