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जीएसटीएन के कारण निर्यातकों को करना पड़ रहा कठिनाइयों का सामना

नई दिल्ली : जीएसटी पोर्टल की तकनीकी खामियों के चलते करदाताओं की मुश्किलें दूर होने का नाम नहीं ले रही हैं. GST नेटवर्क (जीएसटीएन) से डाटा यानी सूचनाएं न मिलने के कारण निर्यातकों को उनका आइजीएसटी रिफंड समय पर नहीं मिल रहा है. इसके चलते बहुत से निर्यातकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

Image result for जीएसटीएन के चलते रिफंड में हो रही है देरी, निर्यातक परेशानसेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट कर एंड कस्टम (सीबीआइसी) की अध्यक्ष वनजा एन सरना के मुताबिक जीएसटीएन सा डेटा न मिल पाने के कारण आइजीएसटी रिफंड के कई दावे लंबित पड़े हैं. जीएसटीएन से डाटा लेने की कोशिशें की जा रही हैं. सरना ने यह बात सीबीआइसी के अधिकारियों को भेजी एक चिट्ठी में कही है. उनका यह बयान इसलिए जरूरी है क्योंकि जब से GSTलागू हुआ है, जीएसटीएन पोर्टल में कई बार खामियां सामने आई हैं.

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यह भी पढ़ें:   पिछले पन्द्रह वर्षों से एमपी में सत्ता को तरस रही कांग्रेस पार्टी ने इस बार यह विधान सभा चुनाव जीतने के लिए न केवल अभी से कमर कस ली है, बल्कि अपने लक्ष्य को पाने के लिए इस बार कांग्रेस पार्टी ने एक अच्छा योजना भी बनाई है। कांग्रेस को यकीन है कि वे इस बार एमपी के सत्ता के सिंहासन पर जरूर बैठेगी। खबर मिली है कि अब कांग्रेस पार्टी ने सत्ता में वापसी के लिए नयी योजन बनाई है ,जिसमें युवा लोगों को तरजीह दी जाएगी । । जबलपुर में प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने बताया कि जो चार या पांच चुनाव लड़े हैं व आयु में वरिष्ठ नागरिक बन चुके हैं, ऐसे लोग विधानसभा में टिकट के ख्वाब देखना बंद कर दें , पार्टी गुजरात की तर्ज पर एमपी में भी नये व युवा चेहरों को प्राथमिकता देगी। उनके इस बयान ने कई पुराने महान नेताओं की आशाओं पर पानी फेर दिया है । यही नहीं कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने यह भी बोला कि इस बार टिकट निर्धारित समय से बहुत पहले बांटें जाएंगे,जिन सीटों पर पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा वहां के 6 माह पहले टिकट दिए जाएंगे ताकि उम्मीदवार को प्रचार का पर्याप्त समय मिल सके। दो बार पराजय का स्वाद चख चुकी कांग्रेस पार्टी इस बार नै रणनीति के साथ मैदान में उतरती दिख रही है, ताकि एमपी की सत्ता पर काबिज हो सके।
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बहरहाल इन खामियों के बावजूद गवर्नमेंट ने निर्यातकों के रिफंड के दावे मंजूर करने की कोशिशें तेज की हैं. सरना के अनुसार गवर्नमेंट वित्त साल2018-19 के पहले महीने में अब तक 650 करोड़ रुपये आइजीएसटी रिफंड मंजूर किया जा चुका है. यह राशि 31 मार्च 2018 तक मंजूर की गयी राशि से अलावा है. हालांकि इन्वॉइस का मिलान न होने  त्रुटियों के चलते अब भी आइजीएसटी के बहुत से रिफंड कस्टम के पास बकाया पड़े हैं. उन्होंने सभी मुख्य आयुक्तों को निर्यातकों के लंबित रिफंड जल्द से जल्द मंजूर कराने के लिए कोशिश करने को भी बोला है.

 उल्लेखनीय है कि निर्यातकों को आइजीएसटी का रिफंड पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा है. रिफंड नहीं मिलने के चलते निर्यातकों को वर्किग कैपिटल की दिक्कत आने लगी थी. मैन्यूफैक्चरिंग करने वाले निर्यातकों के उत्पादन पर भी इसका प्रभाव पड़ने लगा था. यही वजह है कि गवर्नमेंट ने निर्यातकों को रिफंड जारी करने के लिए एक विशेष पखवाड़े का आयोजन भी किया है. गवर्नमेंट ने बीते माह एक पखवाड़े का विशेष अभियान चलाकर अब तक निर्यातकों के 17,616 करोड़ रुपये के रिफंड मंजूर कर दिये हैं. गवर्नमेंटका दावा है कि आइजीएसटी के तहत आने वाले 90 फीसद दावों को मंजूरी दे दी गई है.