Monday , 21 May 2018
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आज भी सीनियर पोस्ट पर लड़कियां करती है कम काम

नई दिल्ली : हिंदुस्तान के कार्यबल में शामिल होने वाली स्त्रियोंकी संख्या में भारी वृद्धि के बावजूद लैंगिक असमानता का स्तर जारी है, खासकर के वरिष्ठ स्तर पर. एक सर्वेक्षण के मुताबिक, 16 फीसद संगठनों में बोर्ड स्तर पर एक भी महिला नहीं है. यह जानकारी एक सर्वे के जरिए सामने आई है. यह अखिल इंडियन सर्वे इंडियन उद्योगों परिसंघ (सीआईआई) इंडियन महिला नेटवर्क (आईडब्ल्यूएन) की ओर से किया गया है.

Image result for सीनियर लेवल पर कम है स्त्रियोंइस सर्वे में पाया गया है कि विविधतापूर्ण चुनौतियां प्रगति में बाधा डालती हैं.वहीं नीतियों के अप्रभावी कार्यान्वयन, नेतृत्व में स्त्रियों की कम भूमिका, लिंग विविधता के लाभों के बारे में जागरूकता की कमी इस असमानता का प्रमुख कारण है. इस सर्वे के मुताबिक करीब 42 फीसद स्त्रियों (सर्वे में भाग लेने वाली) ने बोला कि उन्होंने प्रबंधन स्तर पर पक्षपात का सामना किया है. यह पक्षपात वरिष्ठ स्तर पर ज्यादा होता है  कार्यस्थल में स्त्रियों के विकास को प्रभावित करता है. इसके अलावा, 33 फीसद स्त्रियों का मानना है कि एक ही स्तर पर कार्य कर रहे पुरुष  महिला कर्मचारियों के लिए प्रदर्शन मानक उम्मीदें अलग अलग होती हैं.

 डेल कार्नेगी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर  सीआईआई आईडब्ल्यूएन वेस्टर्न रीजन की चेयरपर्सन पल्लवी झा ने बताया, “यह एक चरम स्थिति है, हमें लैंगिक समानता  स्त्रियों के सशक्तिकरण की राह पर चलना चाहिए. लैंगिक असमानता सूचकांक में हिंदुस्तान की स्थिति बेकार है, जो बेहद चिंताजनक बात है.
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