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मोदी सरकार के खिलाफ पहली बार अविश्वास प्रस्ताव, सदन में हंगामे की वजह से नहीं हो सका विचार

मोदी सरकार के खिलाफ पहली बार अविश्वास प्रस्ताव, सदन में हंगामे की वजह से नहीं हो सका विचार, national news in hindi, national newsनई दिल्ली: लोकसभा में सोमवार (19 मार्च) को वाईएसआर कांग्रेस पार्टी  तेलुगुदेशम पार्टी (टीडीपी) नरेंद्र मोदी गवर्नमेंट के विरूद्ध अपना अविश्वास प्रस्ताव ला सकती हैं वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के वाईवी सुब्बारेड्डी ने लोकसभा सचिवालय को अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस को सोमवार की कार्यवाहियों में सूचीबद्ध करने के लिए लिखा है वहीं टीडीपी ने भी अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस दे रखा है

पिछले हफ्ते नोटिस नहीं लिए जाने पर संसदीय काम मंत्री अनंत कुमार ने दलील दी थी कि सदन में आसन के पास जाकर कई दलों के सदस्यों की नारेबाजी के कारण सदन में व्यवस्था नहीं बन पाने के कारण ऐसा नहीं हो पाया

अविश्वास प्रस्ताव को लेकर BJP है बेफिक्र
लोकसभा में मोदी गवर्नमेंट के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव आने से अच्छा पहले आंध्र प्रदेश में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के हरि बाबू (K Haribabu) ने न्यूज एजेंसी ANI से वार्ता में बोला कि उन्हें जरा भी टेंशन नहीं है हरि बाबू (K Haribabu) ने कहा, ‘बीजेपी के पास लोकसभा में पूर्ण बहुमत है, हम अविश्ववास प्रस्ताव का सामना करने के लिए तैयार हैं ये सभी पार्टियां मिलकर भी भाजपा का कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे, हम सरलता से बहुमत साबित कर देंगे ‘

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हाल ही में टीडीपी ने भाजपा से तोड़ा है नाता
विधायी कार्यों पर गवर्नमेंट के साथ अक्सर योगदान करने वाली तेलंगाना देश समिति  अन्नाद्रमुक कई मुद्दों पर विरोध कर रही है इसलिए इस पर अनिश्चितता ही है कि कल व्यवस्था बन पाएगी  बजट सत्र के अंतिम चरण का पहला दो हफ्ता बीत चुका है हालांकि गवर्नमेंट कई जरूरी विधेयक लाने  बिना चर्चा के ध्वनिमत के जरिए बजट पारित कराने में सफल रही केंद्र की ओर से आंध्रप्रदेश को विशष दर्जा दिए जाने से मना के बाद सबसे पहले वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने पिछले हफ्ते अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया था मुद्दे पर भाजपा की लंबे समय से सहयोगी रही तेदेपा ने इसके बाद गवर्नमेंट से अपना नाता तोड़ने का निर्णय किया  खुद ही अविश्वास प्रस्ताव लायी

दोनों पार्टियां अपने- अपने नोटिसों पर समर्थन जुटाने के लिए विपक्षी दलों को लामबंद कर रही हैं अविश्वास प्रस्ताव नोटिस के लिए सदन में कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन चाहिए गवर्नमेंट ने भरोसा जताया है कि नोटिस स्वीकारकर लिये जाने पर भी लोकसभा में उसकी संख्या बल के कारण प्रस्ताव औंधे मुंह गिर जाएगा लोकसभा में मौजूदा सदस्यों की संख्या539 है  सत्तारूढ़ भाजपा के274 सदस्य हैं यह बहुमत से अधिक है  पार्टी को कई घटक दलों का समर्थन भी है

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हार के बाद अब BJP के पास बहुमत से केवल 1 सीट ज्‍यादा बची
गोरखपुर  फूलपुर उपचुनावों में पराजय के बाद लोकसभा में भाजपा सांसदों की संख्‍या घटकर 273 रह गई है 2014 आम चुनावों में भाजपा ने अपने दम पर 282 लोकसभा सीटें जीती थीं उसके बाद हुए उपचुनावों में कई सीटें हारने के बाद भाजपा के पास अब 273 सीटें बची हैं बहुमत का जादुई आंकड़ा हालांकि 272 सीटों का है ऐसे में अब भाजपा के पास बहुमत से एक सीटें ज्‍यादा हैं हालांकि भाजपा के नेतृत्‍व में एनडीए के पास 300 से भी ज्‍यादा सीटें हैं इस लिहाज से गवर्नमेंट पर किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है

2014 के बाद 6 सीटों पर हार
2014 के बाद से अब तक कुल 19 लोकसभा उपचुनाव हुए हैं इनमें से भाजपा का आठ सीटों पर कब्‍जा था इस दौरान पार्टी केवल वड़ोदरा  शहडोल सीटों को बचाने में सफल रही, जबकि बाकी छह सीटों पर उसे पराजय का सामना करना पड़ा यानी इन चार सालों में गुरदासपुर (पंजाब), रतलाम (मध्‍य प्रदेश), अलवर एवं अजमेर (राजस्‍थान) सीटें भाजपा के हाथ से निकलकर कांग्रेस पार्टी के पास चली गईं अब गोरखपुर  फूलपुर सीटें सपा के खाते में चली गईं यानी कि इस दौरान हुए उपचुनावों में तीन चौथाई सीटें पार्टी के हाथ से निकल गईं

वैसे इन चार सालों में हुए इन उपचुनावों में से 12 सीटों पर उन्‍हीं दलों का कब्‍जा रहा है, जिन्‍होंने 2014 में जीत हासिल की थी इस लिहाज से भाजपा के अतिरिक्त केवल सहयोगी पीडीपी को नुकसान उठाना पड़ा है क्‍योंकि श्रीनगर उपचुनावों में यह सीट पीडीपी के हाथ से निकलकर नेशनल कांफ्रेंस के पास चली गई वहां से फारूक अब्‍दुल्‍ला चुनाव जीत गए यानी कि 2014 के बाद से जो भी लोकसभा उपचुनाव हुए हैं, उनमें से केवल एनडीए को ही नुकसान उठाना पड़ा है विपक्षी दल अपनी सीटें बचाने में सफल रहे हैं