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किसानों को राहत, यूरिया पर 2020 तक सब्सिडी देती रहेगी सरकार

केंद्र गवर्नमेंट ने बुधवार को यूरिया सब्सिडी को 2020 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ ही उर्वरक सब्सिडी के डिस्बर्समेंट के लिए प्रत्यक्ष फायदा ट्रान्सफर (डीबीटी) के क्रियान्वयन को भी मंजूरी प्रदान की.किसानों को यूरिया प्रति टन 5,360 रुपये के संवैधानिक रूप से नियंत्रित मूल्य पर उपलब्ध कराया जाएगा.

45 हजार करोड़ रुपये सब्सिडी का अनुमान
वित्त साल 2018-19 में यूरिया सब्सिडी के 45,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. गवर्नमेंट ने बोला है यूरिया पर सब्सिडी जारी रहने से राष्ट्र भर किसानों को कम मूल्य पर इसकी आपूर्ति होती रहेगी. इससे अगले तीन वर्षों में गवर्नमेंट पर 164935 करोड़ रुपये की लागत आएगी.

पहली बार तीन वर्ष की सब्सिडी पर मुहर
वैसे तो उर्वरक मंत्रालय हर वर्ष यूरिया पर मिलने वाली सब्सिडी पर कैबिनेट में प्रस्ताव रखता है, लेकिन पहली बार गवर्नमेंट ने अगले तीन वर्षों के लिए यूरिया पर सब्सिडी जारी रहने पर मुहर लगाई है.

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45 किलो की बोरी में जल्द मिलेगी यूरिया

किसानों की नाराजगी को थामने में जुटी केंद्र गवर्नमेंट ने यूरिया के दामों में बढ़ोत्तरी नहीं करने का फैसला लिया है. केंद्रीय उर्वरक एवं रसायन मंत्री अनंत कुमार ने बोला है कि यूरिया के दाम नहीं बढ़ने देंगे. कुमार ने बोला कि किसानों की सहूलियत का ख्याल रखते हुए गवर्नमेंट यूरिया के छोटे बैग मुहैया कराने पर विचार कर रही है.हालांकि यह छोटे बैग किसानों को कब से मुहैया होंगे यह अभी तय नहीं है.

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यूरिया के दाम नहीं बढ़ने देंगे
अनंत कुमार ने बताया कि यह प्रस्ताव अभी विचार में है. वर्तमान में किसानों को यूरिया 50 किलो के बैग में हासिल होती है. गवर्नमेंट का कोशिश बैग के आकार को छोटा कर 45 किलो करने का है. गवर्नमेंट की दलील है कि इस कवायद से यूरिया की बचत होगी. किसान अपने फसल में यूरीया की मात्रा तौल कर नहीं डालते हैं. बैग में यूरिया की मात्रा कम करने से इसकी बचत होगी.

6000 से 7000 करोड़ के बचत की उम्मीद 
यूरिया बैग के आकार को कम करने की कवायद को गवर्नमेंट बेशक किसानों की सहूलियत करार दे रही है. मगर मंत्रालय सूत्रों की मानें तो यूरिया के बैग का आकार कम करने से गवर्नमेंट को सालाना 6000 से 7000 करोड़ रूपए की बचत होगी.

गवर्नमेंट के सब्सिडी की रकम बचेगी. वैसे केंद्र गवर्नमेंट ने राष्ट्र को यूरिया उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का फैसला लिया है. इस कोशिश में पुराने कारखानों को प्रारम्भ करने के साथ नए कारखानों की भी शुरूआत हुई है.