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हिंदुस्तान में इलेक्ट्रिक वाहनों की सफलता के लिए

Image result for ZEE जानकारी : हिंदुस्तान में इलेक्ट्रिक वाहनोंDNA में अब हम परिवहन के भविष्य यानी Electirc वाहनों की बात करेंगे हिंदुस्तान एक विकासशील राष्ट्र है  उसकी ऊर्जा की ज़रूरतें बहुत ज्यादा ज्यादा हैं हमारे राष्ट्र में समस्याओं की कोई कमी नहीं है गरीबी, भुखमरी, बेरोज़गारी, बढ़ती हुई जनसंख्या  अशिक्षा जैसी बहुत सी समस्याएं हैं लेकिन इन सबके बीच हिंदुस्तान की जनता को ये समझने का मौका ही नहीं मिलता कि गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण आने वाले कल की एक बहुत बड़ी समस्या हो सकता है राष्ट्र के सभी बड़े शहर लगातार प्रदूषित होते जा रहे हैं सांस लेने के लिए शुद्ध हवा नहीं है  लेकिन इसके बावजूद हमारे राष्ट्र के लोग Electric वाहनों की तरफ से आकर्षित नहीं हो रहे हैं लोगों की पेट्रोल  डीज़ल वाली प्यास ज्यादा बढ़ रही है    इसकी सबसे बड़ी वजह है Electric वाहनों के लिए राष्ट्र में Infrastructure की कमी

ग्रेटर नोएडा के Auto Expo में बहुत सी Electric गाड़ियों के दर्शन हुए हैं लेकिन अभी इन गाड़ियों को सड़कों पर उतरने में वक्त लगेगा यानी कार बनाने वाली कंपनियों ने ग्राहकों को इलेक्ट्रिक वाहनों वाले सुनहरे भविष्य के सपने दिखाने प्रारम्भ कर दिए हैं लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या ये सपने पास हो पाएंगे? इसीलिए आज हम कुछ आंकड़ों की मदद से राष्ट्र में Electirc वाहनों का भविष्य तलाशने की प्रयास करेंगे

आपको जानकर हैरानी होगी कि हिंदुस्तान गवर्नमेंट ने राष्ट्र से पेट्रोल  डीज़ल की कारों को हटाने के लिए Deadline भी तय कर दी है गवर्नमेंट 2030 तक देशभर में चलने वाली 100% सरकारी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक वाहनों से Replace करना चाहती है   एक अनुमान के मुताबिक राष्ट्र भर में सरकारी एजेंसियों के पास अभी 5 लाख वाहन हैं

सरकार राष्ट्र के 40% Private Transport को भी Electric वाहनों पर Shift करना चाहती है हिंदुस्तान गवर्नमेंट ने पिछले वर्ष सितंबर में टाटा मोटर्स को 10 हज़ार Electric Cars का Order दिया है ये Order 1 हज़ार 120 करोड़ रुपये का है

ये कारें दो Phase में गवर्नमेंट को मिलेंगी 500 कारों की पहली Supply इस वर्ष नवंबर के आखिर तक गवर्नमेंट को मिलेगी जबकि बाकी साढ़े 9 हज़ार कारों की Delivery की Deadline अभी तय नहीं है हिंदुस्तान के अतिरिक्त संसार के कई  राष्ट्र हैं, जिन्होंने पेट्रोल  डीज़ल के वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए समयसीमा तय कर ली है

Netherlands  Norway 2025 तक  UK  फ्रांस 2040 तक पेट्रोल  डीज़ल के वाहनों को अपने राष्ट्र से पूरी तरह हटाना चाहते हैं लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या हिंदुस्तान के 40% वाहन 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों पर Shift हो पाएंगे?

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क्योंकि आपको जानकर हैरानी होगी कि 2016 में हिंदुस्तान में सिर्फ 450 इलेक्ट्रिक वाहन बिके हैं जबकि इसी वर्ष चाइना में 3 लाख 36 हज़ार  अमेरिका में 1 लाख 60 हज़ार इलेक्ट्रिक वाहन बिके हैं

इसकी बड़ी वजह ये है कि गवर्नमेंट की तरफ से इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदने के लिए लोगों को उस तरीके से प्रोत्साहित नहीं किया जा रहा है, जैसा कि दूसरे राष्ट्रों में हो रहा हैजर्मनी, जापान  नॉर्वे में इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को Parking Space Free मिलता है इसके अतिरिक्त उन्हें Tax  Toll में छूट भी मिलती है

इसी तरह फ्रांस में अगर आप अपनी डीज़ल या पेट्रोल की पुरानी कार को इलेक्ट्रिक कार से Exchange करते हैं, तो गवर्नमेंट की तरफ Incentives दिए जाते हैं  ये Incentives 4 हज़ार यूरो यानी 3 लाख 15 हज़ार रुपये तक हो सकता है

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भारत गवर्नमेंट चाहती है कि इंडियन सड़कों पर 2020 तक 60 लाख इलेक्ट्रिक वाहन चलने लगें ये लक्ष्य पूरा करने के लिए गवर्नमेंट को फ्रांस, जर्मनी, जापान  नॉर्वे में अपनाए जाने वाले उपायों पर गौर करना चाहिए

सरकार की समस्या सिर्फ लोगों को प्रोत्साहित करने की नहीं है, बल्कि हमारे राष्ट्र में Electric वाहनों के Infrastructure की भी भारी कमी है

Bloomberg New Energy Finance की एक रिपोर्ट के अनुसार 2016 तक हिंदुस्तान में सिर्फ 350 Charging Points थे जबकि चाइना में 2 लाख 15 हज़ार Charging Points थे

जापान में 35 हज़ार पेट्रोल Pumps के मुकाबले 40 हज़ार ऐसे Charging Stations हैं जहां लोग अपनी Electric कार चार्ज कर सकते हैं यानी पेट्रोल पंप कम हैं  चार्जिंग स्टेशन ज़्यादा हैं इस मामले में अमेरिका भी जापान से पीछे है, अमेरिका में करीब 1 लाख 14 हज़ार 500 पेट्रोल Pumps हैं, जबकि सिर्फ 9 हज़ार Charging Stations हैं

जब तक राष्ट्र में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए Charging Stations नहीं होंगे, तब तक लोग पेट्रोल  डीज़ल की गाड़ियां नहीं छोड़ेंगे हमारे राष्ट्र की एक बहुत बड़ी समस्या ये भी है कि गवर्नमेंट ये तो चाहती है कि लोग बिजली से चलने वाली कारें चलाएं, लेकिन उन कारों को चार्ज करने वाली बिजली कोयले से बन रही है

ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक हमारे राष्ट्र में अभी भी 66% बिजली Thermal Power से बनाई जा रही है  इसमें भी 58% बिजली बनाने में कोयले का प्रयोग होता है पेट्रोल डीज़ल की तुलना में कोयले से बिजली बनाने से ज्यादा प्रदूषण होता है

पिछले वर्ष World Health Organization ने संसार के जिन 15 शहरों को सबसे ज्यादा प्रदूषित पाया था, उनमें से 6 शहर हिंदुस्तान के थे  इनमें राष्ट्र की राजधानी दिल्ली भी शामिल थी ऐसे में ये ज़रूरी है कि राष्ट्र जल्द से जल्द इलेक्ट्रिक वाहनों पर शिफ्ट हो जाए लेकिन इसके लिए गवर्नमेंट को ज़्यादा कार्य करना होगा जब तक गवर्नमेंटराष्ट्र में इलेक्ट्रिक वाहनों का Infrastructure तैयार नहीं करती, तब तक आपको Auto Expo में ही भविष्य की Electric Cars दिखाई देंगी