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एसबीआई को तीसरी तिमाही में 1887 करोड़ रुपये का घाटा, एनपीए भी बढ़ा

एसबीआई को तीसरी तिमाही में 1887 करोड़ रुपये का घाटा, एनपीए भी बढ़ामुंबई: सार्वजनिक एरिया के सबसे बड़े बैंक इंडियन स्टेट बैंक (एसबीआई) ने दिसंबर में खत्म तिमाही के दौरान निराशाजनक परिणाम दिखाए हैं तीसरी तिमाही में बैंक को 1,886.57 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है बैंक की दबाव वाली परिसंपत्तियों के बारे में पूरी जानकारी सामने नहीं आने  ट्रेजरी कारोबार में नुकसान के चलते बैंक को यह नुकसान हुआ बैंक ने हालांकि, उम्मीद जताई है कि वित्तीय साल 2018-19 उसके लिए बेहतर रहेगा लेकिन चालू वित्त साल की चौथी तिमाही को लेकर भी बैंक ने ज्यादा उम्मीद नहीं दिखाई है फंसे कर्ज के निवारण में कमजोरी  संपत्तियों के दाम घटने की समस्या भी बैंक के समक्ष है स्टेट बैंक के एकल परिणाम की यदि बात की जाए तो करंट ईयर में बैंक का घाटा  भी ज्यादा 2,416 करोड़ रुपये रहा है

बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘तीसरी तिमाही के परिणाम निश्चित रूप से निराशाजनक रहे हैं, लेकिन आने वाले समय की यदि बात की जाये तो इसको लेकर बहुत ज्यादा उम्मीद हैं पहली अप्रैल से हम सकारात्मक आरंभ करेंगे मैं चौथी तिमाही को लेकर भी न तो काफी उम्मीद में हूं  न ही निराशा में हूं ’’

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आलोच्य तिमाही के दौरान बैंक का 25,000 करोड़ रुपये का कर्ज गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों में परिवर्तित हो गया ऐसा मुख्यतौर एनपीए के बारे में पूरी जानकारी नहीं देने अथवा 23,330 करोड़ रुपये की पिछले वित्त साल की राशि को लेकर भिन्नता होना है यही वजह है कि बैंक का सकल एनपीए यानी कर्ज में फंसी परिसंपत्तियां पिछले वर्ष के 7.23 फीसदी से बढ़कर 10.35 फीसदी हो गई यह नोट करने वाली बात है कि सार्वजनिक एरिया के इस बैंक में पहली बार इस तरह की भिन्नता सामने आई है व्यक्तिगतएरिया के बैंकों में यह एक सामान्य बात है

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रजनीश कुमार ने बोला कि जिस राशि को लेकर असहमति अथवा भिन्नता है उसमें से 90 फीसदी को दबाव वाली परिसंपत्ति के तौर पर मान लिया गया है  उसे एनपीए की श्रेणी में डालना कुछ ही समय की बात है

उन्होंने बोला कि फंसे कर्ज के एवज में कुल प्रावधान एक वर्ष पहले जहां 7,244 करोड़ रुपये था वहीं इस वर्ष यह बढ़कर 17,759 करोड़ रुपये हो गया इसमें 6,000 करोड़ रुपये का प्रावधान असहमति वाले हिस्से के लिये हुआ है इसे मिलाकर प्रावधान का कवरेज औसत बढ़कर 65.92 फीसदी हो गई

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