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नए वर्ष में बैंकिंग सुविधाओं पर रहेगा मुख्य ध्यान, गवर्नमेंट करेगी 2.11 लाख करोड़ का निवेश

बैंकों को गैर निष्पादित परिसंत्ति (एनपीए) के दलदल से बाहर निकालने के लिए  ऋण विकास दर को 25 वर्ष के निचले स्तर से ऊपर उठाने की प्रयास के तहत गवर्नमेंट नए वर्षमें बैंकिंग सेक्टर में सुधार के पथ पर तेजी से आगे बढ़ेगी  सरकारी बैंकों में नयी पूंजी का निवेश करेगी. पूंजी निवेश
गवर्नमेंट ने अक्तूबर में घोषणा की थी कि वह अगले दो वर्ष में एनपीए से जूझ रहे सरकारी बैंकों में 2.11 लाख करोड़ रुपये का पूंजी निवेश करेगी. इसमें से 1.35 लाख करोड़ रुपये रिकैपिटलाइजेशन बांड के जरिए निवेश किए जाएंगे.

वित्तीय मंत्रालय जल्द ही इस बांड की बारीकियों  निवेश की जाने वाली रकम की घोषणा कर सकता है. सरकारी बैंकों का एनपीए जून 2017 तक बढ़कर 7.33 लाख करोड़ रुपये का हो चुका है, जो मार्च 2015 में महज 2.75 लाख करोड़ रुपये था.

बैंकिंग सुधार
पूंजी निवेश के साथ बैंकों में कई सुधार भी करने होंगे. इनमें बैंकों के बोर्ड का सशक्तीकरण, एनपीए का निवारण  मानव संसाधन का मुद्दा शामिल है. वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार ने बोला कि सुधार शीर्ष प्राथमिकता है. इस दिशा में सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), वित्तीय समावेशीकरण  रोजगार सृजन पर विशेष जोड़ रहेगा.

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सरकारी बैंकों का विलय

इस वर्ष बैंकिंग सुधार के लिए उठाए गए बड़े कदमों के तहत सरकारी बैंकों में विलय की गुंजाइश बढ़ाने के लिए कैबिनेट ने अगस्त में वैकल्पिक प्रणाली के जरिए सरकारी बैंकों के विलय को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है.

गत महीने वित्त  कंपनी मामलों के मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गाया, जो बैंकों की ओर से आने वाले प्रस्तावों की समीक्षा करेगी. समिति द्वारा मंजूर किए गए प्रस्तावों पर एक रिपोर्ट हर तीन महीने पर कैबिनेट को भेजा जाएगा.

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एनपीए समाधान
गवर्नमेंट ने इस साल एनपीए निवारण की दिशा में दो अध्यादेश लाए हैं- बैंकिंग नियमन (संशोधन) अध्यादेश 2017  दिवाला  दिवालियापन संहिता (संशोधन) अध्यादेश 2017.बैंकिंग नियमन (संशोधन) अध्यादेश 2017 कानून की शक्ल ले चुका है, जो भारतीय रिजर्व बैंक को किसी भी बैंक को दिवाला प्रक्रिया प्रारम्भ करने  किसी भी एनपीए का निवारणकरने का आदेश देने की अनुमति देता है.

कर्ज नहीं चुकाने वाले पर सख्ती
गवर्नमेंट ने गत माह एक अध्यादेश के जरिए जानबूझ कर बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने वालों  एनपीए खाताधारकों को उनके बकाए कर्ज की वसूली के लिए दिवालियापन प्रक्रिया के तहत उनकी कंपनी की होने वाली नीलामी में उन्हें बोली लगाने से रोक लगा दी. इस अध्यादेश पर हालांकि अब भी संसद की मुहर लगनी बाकी है.

सहयोगी बैंकों का एसबीआई में विलय
2017 की एक अन्य जरूरी घटना है पांच सहयोगी बैंकों  इंडियन महिला बैंक का इंडियन स्टेट बैंक (एसबीआई) में विलय, जिससे एसबीआई संपत्ति के मामले में संसार के 50 सबसे बड़े बैंकों के समूह में शामिल हो गया.

इस विलय के बाद एसबीआई का कुल ग्राहक आधार 37 करोड़ हो गया. बैंकों की शाखाओं की संख्या 24,000 हो गई  देशभर में उसके करीब 59,000 एटीएम हो गए.विलय के बाद एसबीआई का कुल जमा आधार 26 लाख करोड़ रुपये से अधिक  कुल ऋण आधार 18.50 लाख करोड़ रुपये का हो गया है.