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रियल इस्टेट के कई बिल्डर्स पर गिरी गाज , पजेशन देने पर रहा जोर

2017 रियल इस्टेट सेक्टर के लिए बहुत ज्यादा उतार चढ़ाव देखने को मिला. इस वर्षसेक्टर में नोटबंदी के बाद से निवेश करने का माहौल समाप्त हो गया था. वहीं उसके बाद रेरा, जीएसटी, प्रमुख बिल्डरों के दिवालिया होने से लोगों का विश्ववास प्रॉपर्टी सेक्टर से हट गया है.

रियल इस्टेट सेक्टर में नहीं हुए नए प्रोजेक्ट लॉन्च 
इस वर्ष रियल इस्टेट कंपनियों ने  नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने में भी किसी तरह की कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई. इस वर्ष कंपनियों का सारा जोर पुराने प्रोजेक्ट में निवेश किए बायर्स को फ्लैट का पजेशन देने में रहा. ऐसा इसलिए ताकि बायर्स का विश्ववास पूरी तरह से बिल्डरों पर बना रहे.

कई कंपनियों पर लटकी न्यायालय की तलवार
राष्ट्र भर में कई नामी गिरामी रियल इस्टेट कंपनियों पर इस वर्ष न्यायालय की तलवार लटकी रही. सुपरटेक, आम्रपाली, जेपी ग्रुप, यूनिटेक, गार्डेनिया आदि कंपनियों पर सुप्रीम न्यायालय  नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में दिवालिया घोषित करने का केस प्रारम्भ हुआ अगले वर्ष भी यह केस जारी रहेंगे.

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40 प्रतिशत कम हुए लॉन्च

इस वर्ष बिल्डरों ने रेरा कानून लागू होने के बाद से नए प्रोजेक्ट को लॉन्च करने में कमी कर दी थी. इस वर्ष करीब 40 प्रतिशत कमी नए प्रोजेक्ट में देखी गई. दिवालिया घोषित होने की कगार पर खड़ी रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक पर अब पूरी तरह से केंद्र गवर्नमेंट का कंट्रोल होगा. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने केंद्र गवर्नमेंट को अधिकार दिया है कि वो कंपनी में 10 नए डायरेक्टर्स को नियुक्त करें.

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सुप्रीम न्यायालय ने दिवालिया होने की कगार पर खड़े आम्रपाली ग्रुप के निदेशकों को आदेश दिया है कि वो जल्द से जल्द बायर्स को उनका पैसा वापस करने के लिए एक नयीवेबसाइट बनाएं, जिस पर बायर्स अपना क्लेम फाइल कर सकें.

सरकार देखेगी रेरा से जुड़े मामले
घर खरीददारों को बड़ी राहत देते हुए  उन्हें बिल्डर द्वारा किसी तरह की धोखाधड़ी न हो, इसके लिए लिए केंद्र गवर्नमेंट आगे आई है. अब से रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े सभी मामलों को शहरी विकास मंत्रालय देखेगा. मंत्रालय वो मामले देखेगा जो रेरा कानून के तहत आएंगे.

देना होगा बिल्डर्स को हिसाब-किताब
बिल्डर्स को अब अपनी उन प्रॉपर्टी(पूरी तरह से तैयार फ्लैट, विला) का भी हिसाब-किताब देना होगा, जो बिकी नहीं है. इसके अतिरिक्त ऐसी प्रॉपर्टी पर कर भी देना होगा. अभी अनसोल्ड प्रॉपर्टी पर बिल्डर्स को किसी तरह का कोई कर नहीं देना होता है. वो इन्हें स्टॉक-इन-ट्रेड दिखाते हैं. इनके बिकने पर यह ‘प्रॉपर्टी बेचने पर हुई इनकम या फिर बिजनेस इनकम’ दिखाते हैं.

इनकम कर डिपार्टमेंट ने दिया वित्त मंत्रालय को सुझाव
इनकम कर मंत्रालय ने हाल ही वित्त मंत्रालय को सुझाव दिया है कि वो ऐसा कर लगा सकते हैं. इसकी घोषणा गवर्नमेंट बजट में या फिर उससे पहले भी कर सकती है. अगर यह नियम लागू होता है तो फिर बिल्डर्स को अपनी प्रॉपर्टी को कम प्राइस पर बेचना होगा या फिर न्यायालय का सामना करना पड़ेगा.